Traditions: भारत के इस गांव में नई नवेली दुल्हनों को 5 दिन रखा जाता है निर्वस्त्र, प्रथा जान होगी हैरान

Kumar Sandeep
Kumar Sandeep  - Editor
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Traditions: हमारा देश विविधताओं से भरा है। विभिन्न जातियों के लोग हर राज्य, शहर और गांव में देखे जा सकते हैं। यहां सबकी अलग-अलग परंपराएं हैं।

कुछ परंपराएं ऐसी भी हैं जो अंधविश्वास से जुड़ी हैं। तो कुछ प्रथाएं (Traditions) ऐसी भी हैं जिनके बारे में सुनकर हम हैरान रह जाते हैं। ऐसी ही एक परंपरा हिमाचल प्रदेश की मणिकर्ण घाटी के पीणी गांव की भी है, आइए जानते हैं इसके बारे में…

Traditions के अनुसार महिलाएं दिन में कपड़े नहीं पहनती हैं

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पिनी गांव में एक अजीबोगरीब परंपरा है कि यहां रहने वाली महिलाएं साल में कम से कम पांच दिन कपड़े नहीं पहनती हैं। इसके अलावा पांच दिनों तक महिलाओं को अपने ही पति से बात करने या हंसने की इजाजत नहीं होती है। हर साल सावन के महीने में महिलाएं इस परंपरा को निभाती हैं। सावन के पांच दिनों तक वह नंगी रहती हैं।

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माना जाता है कि अगर कोई महिला इस परंपरा का पालन नहीं करती है तो उसके घर में अशुभ घटनाएं होने लगती हैं। गलत समाचार सुनने को मिलता है। इसी वजह से आज तक इस परंपरा का पालन किया जाता है। हालांकि समय के साथ कुछ बदलाव देखे गए हैं।

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पहले की भाँति स्त्रियाँ अपने शरीर पर एक भी वस्त्र नहीं पहनती थीं, परन्तु अब वे इन पाँच दिनों तक वस्त्र के स्थान पर ऊन का बना एक पतला पहाड़ी वस्त्र धारण करती हैं। इसे पट्टू कहा जाता है।

इसके पीछे भी एक कहानी है। कहा जाता है कि सदियों पहले इस गांव में एक राक्षस रहता था जो खूबसूरत कपड़े पहनने वाली महिलाओं को उठा ले जाता था। भगवान लहुआ ने इस राक्षस को मार डाला। आज भी, माना जाता है कि देवता गाँव में बुराइयों का अंत करते हैं। इस घटना के बाद ही यह प्रथा शुरू हुई और महिलाओं ने सावन के महीने में अपने शरीर पर लगे वस्त्रों का त्याग कर दिया।

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मेरा नाम संदीप कुमार है. मैं हरियाणा का निवासी हूं. मैंने स्नातक तक की पढ़ाई पूरी कर ली है. वर्तमान में मै SSORajasthan.in पर बतौर लेखक के रूप में कार्य कर रहा हूं. मै सरकार के द्वारा चलाई जा रही विभिन्न स्कीम, एजुकेशन और लाइफ स्टाइल से जुड़े विभिन्न कंटेंट जितनी जल्द हो सके पाठको तक पहुंचाने की कोशिश करता हूँ.
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